उच्च शिक्षा में गुणात्मक और अधोसंरचनात्मक सुधार

मध्यप्रदेश में बारह साल में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बढ़ाने के साथ ही शिक्षण सुविधाओं में भारी इजाफा किया गया है। प्रदेश में उच्च शिक्षा अधोसंरचना के विकास के साथ ही व्यावसायिक, चिकित्सकीय, वाणिज्यिक, प्रबंधन शिक्षण संस्थाओं की संख्या इस अरसे में बढ़ी है। प्रदेश से उच्च शिक्षा के लिये देश के अन्य राज्यों में जाने वाले छात्रों की संख्या में कमी हुई है, तो दूसरी और प्रदेश इस क्षेत्र में उत्तर भारत का शिक्षा हब बनने की ओर अग्रसर है।

प्रदेश सरकार के विशेष प्रयासों से उच्च शिक्षा में गुणात्मक और अधोसंरचनात्मक सुधार के लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान(रूसा) में प्रदेश को हाल ही में 269 करोड़ रुपये मिले हैं। साथ ही विश्व बैंक के तकनीकी तथा आर्थिक सहयोग से ‘मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा गुणवत्ता सुधार परियोजना’ प्रारंभ की गयी है। प्रोजेक्ट की लागत 430 मिलियन डालर, अर्थात् लगभग 280 करोड़ रुपये है। इसमें 300 मिलियन डालर अर्थात् लगभग 1950 करोड़ रुपये विश्व बैंक द्वारा साफ्ट लोन के रूप में दिये गये हैं। साथ ही 130 मिलियन डालर अर्थात् लगभग 847 करोड़ रुपये का योगदान राज्य शासन का होगा।

परियोजना का लक्ष्य है सब की उच्च शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करना तथा सुशासन और बेहतर आर्थिक प्रबंधन के माध्यम से सुधार करना। परियोजना 6 वर्ष के लिए है।

परियोजना में 50 भवन विहीन महाविद्यालय भवन का तथा हॉस्टल एवं कर्मचारी निवासों का निर्माण करवाया जायेगा। प्रदेश में 6 उत्कृष्टता संस्थान की स्थापना की जायेगी। महाविद्यालयों के विभिन्न विभाग के भवनों का उन्नयन होगा। रोजगारमूलक क्षेत्रों में नये विभागों को प्रारंभ किया जायेगा। दृष्टि-बाधित विद्यार्थियों के लिये ऑडियो पुस्तकें, ब्रेल पुस्तकें और विशेष सॉफ्वेयर तथा बाधा मुक्त वातावरण के लिये उपकरण-शिक्षण सहायता उपलब्ध करवायी जायेगी।। प्रदेश के 300 महाविद्यालय में DCA/PGDCA पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के लिए सेन्ट्रल कम्प्यूटर लेब स्थापित होंगी। लेब के लिए 20 कम्प्यूटर प्रत्येक महाविद्यालय को दिये जायेंगे। महाविद्यालयों में कक्षाओं के लिये फर्नीचर की व्यवस्था की जायेगी। पुस्तकालयों में ई-संसाधन केन्द्रों की स्थापना होगी। महाविद्यालयों को आरएफआईडी और बारकोड रीडर,सोल सॉफ्टवेयर तथा जीपीएस चिप आधारित टेगिंग (स्मार्ट कार्ड),पत्रिकाएँ, 2000 ई-पुस्तक और 5000 मुद्रित पुस्तक उपलब्ध करवायी जायेगी।

प्रदेश के 200 महाविद्यालय के 10 विभाग के लिए पाँच कम्प्यूटर प्रति विभाग देने के साथ ही GIS लेब और पुस्तकालय तथा ई- संसाधन केन्द्र की स्थापना की जायेगी। स्व-वित्त आधार पर नये एक से तीन माह के सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ किये जायेंगे। स्मार्ट क्लास-रूम बनाये जायेंगे। कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्रों का निर्माण कर 200 महाविद्यालय में कौशल आधारित डिप्लोमा और सर्टिफिकेट प्रोग्राम प्रारंभ किये जायेंगे।

सात भाषाओं अंग्रेजी, हिन्दी, फ्रेंच, जर्मनी, जापानी तथा दो अन्य भारतीय भाषाओं के शिक्षा सॉफ्टवेयर युक्त भाषा प्रयोगशालाओं की स्थापना की जायेगी। उद्योगों में इंटर्नशिप और ट्रेनिंग दिलवायी जायेगी। गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विचार-विमर्श एवं उपचारात्मक कक्षाएँ लगेंगी। प्रदेश के 200 महाविद्यालय में अनुसंधान और विकास गतिविधियों को बढ़ाने के लिए उद्योगों के साथ लिंकेज ,संकाय प्रशिक्षण एवं विद्यार्थियों को औद्योगिक क्षेत्रों का भ्रमण करवाया जायेगा। महाविद्यालयों को फ्री वाई-फाई स्मार्ट परिसर बनाया जायेगा। पर्यावरण सुधार गतिविधियों जैसे पानी, साफ-सफाई, स्वास्थ्य, छत जल पुनर्भरण, जल संचयन, सुविधा-घर आदि को प्रभावी ढंग से लागू करवाया जायेगा। युवा और खेल गतिविधियों में स्वास्थ्य केन्द्र,ध्यान केन्द्र तथा 50 महाविद्यालय में योग, खेल के डिप्लोमा/सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम प्रारंभ करवाये जायेंगे।

प्रदेश के 9 विश्वविद्यालय में तीन-तीन विभाग (मानविकी/वाणिज्य/विज्ञान) को उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित किया जायेगा। उत्कृष्टतर केन्द्रों के रूप में 100 महाविद्यालय के 2 विभाग का उन्नयन किया जायेगा। शोध-पत्र प्रकाशन के लिये प्रोत्साहित किया जायेगा। उद्योग और अनुसंधान प्रयोगशालाओं के साथ करारनामे होंगे। महाविद्यालयों में अनुसंधान और विकास गतिविधियों और संकाय प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जायेगा।

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) में प्रदेश को 6 कम्पोनेंट में 269 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इसमें से इस वित्त वर्ष में 134 करोड़ 50 लाख और इतनी ही राशि अगले वित्त वर्ष में मिलेगी। पं. एस.एन. शुक्ला शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय शहडोल का उन्नयन विश्वविद्यालय के रूप में किया जायेगा। इसके लिये 55 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं।

रूसा में विश्वविद्यालय की अधोसंरचना विकास के लिये इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर विश्वविद्यालय का चयन किया गया है। प्रत्येक को 20-20 करोड़ रुपये मिलेंगे। पाँच नवीन आदर्श महाविद्यालय की स्थापना की जायेगी। यह कॉलेज श्योपुर, झाबुआ, हरदा, डिण्डोरी और उमरिया में बनेंगे। प्रत्येक को 12-12 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। शासकीय महाविद्यालय देपालपुर और सीहोरा का उन्नयन आदर्श महाविद्यालय के रूप में किया जायेगा। इन्हें चार-चार करोड़ रुपये दिये जायेंगे। धार में नया इंजीनियरिंग कॉलेज खुलेगा। इसके लिये 26 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। तीस महाविद्यालय को अधोसंरचना विकास के लिये दो-दो करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं।

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