मध्यप्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में मॉडल स्टेट बनकर उभरा

ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियों के कारण मध्यप्रदेश सारे देश में एक मॉडल स्टेट बनकर उभरा है। पिछले कुछ वर्ष में बिजली के सुधार के क्षेत्र में 60 हजार करोड़ रुपये के कार्य किये गये हैं। जिन पैमानों के कारण किसी भी राज्य की गिनती विकसित राज्यों की श्रेणी में होती है उनमें बिजली भी प्रमुख है। इस तरह बिजली के मामलें में मध्यप्रदेश सही मायनों में विकसित राज्य हो गया है। प्रदेश में कुछ वर्षों में बिजली का उत्पादन बढ़ने से ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की पहचान सरप्लस स्टेट के रूप में हुई है। उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल सके, इसके लिये बिजली वितरण के क्षेत्र में भी सुधार के अनेक कार्य किये गये हैं। राज्य में किसानों को सूखे से राहत देने के लिये बिजली के मामले में भी अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिये गये हैं। राज्य सरकार ने बिजली संयंत्रों के बेहतर रख-रखाव, वितरण और बिजली के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया है।

बिजली उत्पादन क्षमता 15 हजार 400 मेगावॉट हुई

प्रदेश में बिजली की माँग और उपलब्धता के अंतर को दूर करने तथा बढ़ती हुई माँग को ध्यान में रखते हुए सघन प्रयास किये गये। अब प्रदेश की कुल बिजली क्षमता 15 हजार 400 मेगावॉट हो गयी है। पिछले वित्त वर्ष राज्य में 9,832 मेगावॉट अधिकतम विद्युत माँग की पूर्ति की गई थी। इस वर्ष 20 अक्टूबर, 2015 को अधिकतम 9915 मेगावॉट माँग की पूर्ति की गई। वर्तमान दीर्घकालीन अनुबंधों के आधार पर वित्तीय वर्ष 2022 तक प्रदेश की विद्युत के क्षेत्र में आत्म-निर्भरता की स्थिति बनी रहेगी। इस वित्त वर्ष के दौरान प्रदेश में 63 हजार 10 मिलियन यूनिट बिजली की माँग रहने का अनुमान लगाया गया है। माँग के अनुरूप प्रदेश में बिजली की शत-प्रतिशत आपूर्ति कर ली जायेगी। इस वर्ष प्रदेश में 10 हजार मेगावॉट से अधिक विद्युत की माँग की आपूर्ति की व्यवस्था है। पिछले साल राज्य स्वामित्व की मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी लिमिटेड की सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना की 600 मेगावॉट की द्वितीय इकाई को क्रियाशील कर उससे वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया गया है।

ट्रांसमिशन प्रणाली का सुदृढ़ीकरण

राज्य में बिजली की माँग में बढ़ोत्तरी के अनुरूप ट्रांसमिशन प्रणाली के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण के लिये व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष में 1187 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों और 4,294 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च-दाब उप-केन्द्रों के कार्य पूरे किये गये हैं। इस वित्त वर्ष में 1036 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों तथा 4494 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च-दाब उप-केन्द्रों से संबंधित कार्य किये जायेंगे। वर्तमान में प्रदेश में ट्रांसमिशन प्रणाली की 2.82 प्रतिशत हानियाँ देश में न्यूनतम स्तर पर हैं। ट्रांसमिशन प्रणाली की उपलब्धता की भी नियामक आयोग द्वारा निर्धारित मानक से अधिक लगभग 99 प्रतिशत है।

प्रदेश में बिजली की गुणवत्ता के सुधार के लिये जो कार्य किये गये हैं, उनके परिणामस्वरूप विद्युत प्रदाय की गुणवत्ता में व्यापक सुधार हुआ है। पिछले वित्त वर्ष में विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा 33/11 के.व्ही. के 99 नये उप-केन्द्र स्थापित किये गये और 464 उप-केन्द्र में पॉवर ट्रांसफार्मर की क्षमता में वृद्धि के साथ अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर लगाये गये हैं। अटल ज्योति अभियान के सफल क्रियान्वयन से अब सभी 51 जिले के आबाद क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं को 24 घंटे तथा कृषि उपभोक्ताओं को 10 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली प्रदाय की जा रही है।

कृषकों की सुविधा के लिये स्थायी पम्प कनेक्शन

प्रदेश में किसानों को खेती के लिये सिंचाई की सुविधा के लिये स्थायी पम्प कनेक्शन देने को प्राथमिकता दी गई है। पिछले वित्त वर्ष में किसानों को सिंचाई के लिये 3 लाख 30 हजार स्थायी पम्प कनेक्शन दिये गये हैं। राज्य सरकार द्वारा कृषक अनुदान योजना में किसानों को अब तक 963 करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया गया है। इस वित्त वर्ष में कृषक अनुदान योजना में 215 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार द्वारा स्थायी अमीटरीकृत कृषि पम्प के लिये फ्लेट रेट योजना भी लागू की गयी है। इसके अंतर्गत किसानों को विद्युत नियामक आयोग द्वारा लागू की गयी विद्युत दरों में से मात्र 1200 रुपये प्रति हार्स-पॉवर सालाना की दर से वर्ष में दो छमाही किश्तों में बिजली बिलों का भुगतान करने की सुविधा दी गयी है। शेष राशि का भार राज्य सरकार द्वार सबसिडी के रूप में किया जा रहा है। राज्य में एक हेक्टेयर तक भूमि वाले अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को 5 हार्स-पॉवर तक पम्प के लिये नि:शुल्क विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। पिछले वित्त वर्ष में टेरिफ सबसिडी एवं नि:शुल्क विद्युत प्रदाय के लिय 4,480 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा विद्युत वितरण कम्पनियों को दिये गये हैं। इस वित्त वर्ष में इस मद में 5,362 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

किसानों के हित में फैसला

मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्से अवर्षा की स्थिति का सामना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने विभिन्न विभाग को किसानों के हित में योजना बनाने के निर्देश दिये हैं। ऊर्जा विभाग ने किसानों को राहत देने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला किया है। इस फैसले के बाद रबी मौसम में सिंचाई के लिये अस्थायी कनेक्शन देने के लिये 3 माह के विद्युत देयक की अग्रिम राशि जमा करवाने के स्थान पर अब केवल 2 माह के विद्युत देयक की राशि अग्रिम जमा करवाने पर ही किसानों को अस्थायी कनेक्शन दिया जा सकेगा। प्रदेश में इस फैसले से करीब 6 लाख किसान को 180 करोड़ की राहत मिलेगी। किसानों को कृषि पम्प कनेक्शन के लिये पानी की उपलब्धता के प्रमाण-पत्र में छूट दी गयी है। प्रदेश में कोई किसान सिंचाई पम्प के लिये कनेक्शन माँगता है, तो अब उससे पानी की उपलब्धता संबंधी प्रमाण-पत्र नहीं माँगा जायेगा।

एक करोड़ से अधिक हुए घरेलू बिजली उपभोक्ता

प्रदेश में इस वर्ष पहली तिमाही में जून 2015 तक घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या में एक लाख से अधिक की वृद्धि हुई है। प्रदेश में अब सभी श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं की संख्या एक करोड़ 16 लाख 72 हजार हो गयी है।

उच्च-दाब उपभोक्ताओं के लिये संकल्प ऑनलाइन योजना

प्रदेश में बढ़ते औद्योगिक निवेश को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा विभाग ने उच्च-दाब उपभोक्ताओं को कनेक्शन देने के लिये संकल्प ऑनलाइन सेवा प्रारंभ की है। इस सेवा के प्रारंभ होने से उपभोक्ता को बगैर देरी के निर्धारित समय पर बिजली कनेक्शन मिल रहा है।

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