स्मार्ट विलेज – स्मार्ट पंचायत

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का सपना था कि हर गाँव में शहरों जैसी बेहतर बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम हो। उनके सपनों को साकार करने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रदेश के गाँवों की तस्वीर बदलने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश के गाँव समृद्ध और आत्म-निर्भर बने, इस उद्देश्य से ”स्मार्ट गाँव – स्मार्ट पंचायत” की अवधारणा के साथ ग्रामीण अंचलों के समग्र विकास की नई रणनीति लागू की जा रही है।

स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित होकर हजारों गाँव तरक्की के नये रास्ते पर आगे बढ़े, इसके लिये गाँव-गाँव में अधोसंरचना विकास के साथ सामाजिक सुरक्षा तथा आर्थिक और वैयक्तिक विकास की दिशा में सुनियोजित प्रयास हो रहे हैं। गाँव के विकास में सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। विकास योजना और कल्याणकारी कार्यक्रमों में ग्रामीणों की भागीदारी और पारस्परिक सहयोग से उनमें आत्म-विश्वास के साथ ही स्वैच्छिक सेवा भावना जाग्रत हुई है। विकास में ग्रामीणों की भागीदारी और जागरूकता से ग्रामीण परिवेश बदल रहा हैं। प्रदेश के गाँव समृद्ध, स्वच्छ और सशक्त बन सके इसलिये विभिन्न कार्यक्रम और योजनाओं के जरिये गाँव की तस्वीर बदलने और सामाजिक तथा आर्थिक विकास के सुनियोजित प्रयास हो रहे हैं। गाँव में कमजोर तबकों के लिये सामाजिक न्याय की सुनिश्चितता, स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन और अनुशासन के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना विकसित करने सकारात्मक प्रयास शुरू हुए हैं। विकास की इस नई रोशनी से हर गाँव जगमग होगा।

गाँव में संपर्क और संचार सुविधाएँ

गाँव में पक्की सड़कें, पीने के पानी का इंतजाम और बैंक सुविधाओं से लोगों के जीवन में नया बदलाव आया है। ग्रामीण अंचलों में बढ़ी तादाद में ग्राम पंचायतों, आँगनवाड़ियों और स्कूलों के लिये नये भवन बन रहे हैं। प्रदेश के गॉव इंटरनेट के जरिये दुनिया से जुड़ सकें इसलिये पंचायत भवनों में आधुनिक ई-पंचायत कक्ष बनाये जा रहे हैं। यहॉ कम्प्यूटर, प्रिंटर और टेलीविजन सुविधा भी मुहैया करवाई गई है। ग्राम पंचायतों को सशक्त और अधिकार संपन्न बनाने के लिये पंचायत प्रतिनिधियों को गाँव के विकास के व्यापक अधिकार दिये गये हैं। इसी वजह से त्रि-स्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि अपने दायित्वों को सफलता से निभा रहे हैं।

स्वच्छता तथा पर्यावरण सुधार

गाँवों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही गाँवों के पर्यावरण को बेहतर बनाने और स्वच्छता का वातावरण निर्मित करने की दिशा में सफल प्रयास हुए हैं। पंच-परमेश्वर योजना के जरिये ग्राम पंचायतों को उनकी आबादी के मान से एकमुश्त राशि दी जा रही है। इससे ग्राम पंचायतें अपने-अपने गाँवों में सीमेंट-कांक्रीट युक्त पक्की आंतरिक सड़कें और नालियाँ बन रही हैं। पंच-परमेश्वर योजना में ग्राम पंचायतों को दी जाने वाली राशि में से 20 फीसदी अनाबद्ध राशि से गाँवों में सड़क, नाली, स्कूल, आँगनवाड़ियों, ग्राम पंचायत और सामुदायिक भवनों की साफ-सफाई का काम बेहतर तरीके से हो रहा है। शाला भवनों में मध्यान्ह भोजन की सुचारू व्यवस्था और स्वच्छता के लिये नये किचन शेड और डायनिंग हाल बन रहे हैं। बच्चों को भोजन से पहले सही तरीके से हाथ धुलाई की व्यवस्था के लिये हेण्डवाशिंग प्लेटफार्म बनाये गये हैं। स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिये अलग-अलग शौचालय तथा पानी के लिये हेण्ड लिफ्ट फोर्स पम्प की व्यवस्था हो रही है।

 आजीविका और रोजगार

गरीब तबकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिये रोजगार के साधन उपलब्ध करवाये जा रहे है। ग्रामीण अंचलों में कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के साथ ही गरीब परिवार को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में करीब एक लाख चार हजार स्व-सहायता समूहों के जरिये 12 लाख से अधिक गरीब ग्रामीण महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है। इनमें से एक लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों की सालाना आय अब एक लाख से भी ज्यादा हो चुकी है। प्रदेश के 518 गाँव ऐसे हैं, जहाँ सभी ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं और अब वहाँ कोई भी युवा बेराजगार नहीं है।

पंचायतों की सक्रिय भूमिका से बदलाव

गाँवों के विकास और ग्रामीणों की भलाई के लिये ग्राम पंचायतें केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का संचालन बेहतर तरीके से कर रही हैं। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों की व्यापक भागीदारी रहती है। ग्रामीण महिलाएँ भी आगे बढ़कर ग्राम सभा में शामिल हो रही हैं। पंचायतें अपनी आय बढ़ाने के लिये करारोपण पर भी ध्यान देने लगी है। गाँव में बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी पंचायतें बेहतर ढंग से निभा रही हैं। नल-जल योजनाओं के संचालन, पक्की सड़कें और नालियॉ बनाने, स्ट्रीट लाइट, आँगनवाड़ी, स्वास्थ्य केन्द्रों और शाला भवनों की सुचारू व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की देख-रेख और पर्यावरण सुधार के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। गाँव में बुजुर्ग, निःशक्तजन और विधवाओं को सामाजिक सुरक्षा पेंशन समय पर दिलवाने तथा उनकी भलाई के काम में भी पंचायतें अग्रणी हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी से ग्राम विकास

”डिजिटल इंडिया” कार्यक्रम में प्रदेश की सभी ग्राम पंचायत को डिजिटल पंचायत बनाने के लिये राज्य सरकार ने आधुनिक संसाधन उपलब्ध करवा दी गई हैं। सभी 23 हजार 6 ग्राम पंचायत में एक लाख लागत से कंम्प्यूटर, प्रिंटर, वेब केम, 40 इंच आकार का बड़ा एलसीडी टीवी जैसी आधुनिक संचार सुविधाएँ उपलब्ध करवा दी गई हैं। सभी ग्राम पंचायत में ई-पंचायत कक्ष बनाये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में इस साल त्रि-स्तरीय पंचायत के निर्वाचन सफलता से करवाये गये हैं। पंचम पंचायत आम निर्वाचन में कुल 3 लाख 93 हजार 339 पंचायत प्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं। इसमें 527 ग्राम पंचायतें निर्विरोध निर्वाचित हुई है। ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनुशासन लागू करने और पारदर्शिता के लिये अब एक पंचायत और एक खाता व्यवस्था लागू की गई है। सुरक्षित भुगतान के उद्देश्य से अब नगद या चेक देने के बदले पंचायत के बैंक खाते से ऑनलाइन भुगतान हो रहा है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर हर पंचायत के सामुदायिक विकास कार्यों और हितग्राही मूलक योजनाओं की जानकारी दर्ज की जा रही है। इससे ग्राम पंचायतों के काम-काज और हिसाब-किताब में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

स्वस्थ बच्चे-स्वस्थ प्रदेश

राज्य सरकार नन्हें-मुन्ने बच्चों और विद्यार्थियों की सेहत पर विशेष ध्यान दे रही है। बच्चों की तंदुरूस्ती के लिये मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में 15 जुलाई से सभी प्राथमिक स्कूल और आँगनवाड़ी में सप्ताह में तीन दिन सुगंधित मीठा दूध वितरण किया जा रहा है। अब आँगनवाड़ी और प्राथमिक शालाओं के 79 लाख 94 हजार बच्चों को हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुगंधित दूध दिया जा रहा है। कार्यक्रम में बच्चों के लिये भोजन पकाने का काम स्वच्छता के साथ धुआं रहित वातावरण में हो इस उद्देश्य से ग्रामीण शालाओं में 89 हजार 666 नये किचनशेड बनाये गये हैं। साथ ही प्रत्येक जिले में 500 एलपीजी कनेक्शन अनुसार प्रदेश में कुल 25 हजार 500 गैस कनेक्शन भी दिये गये हैं। राज्य की 79 हजार शाला में भोजन बनाने की बेहतर व्यवस्था के लिये स्व-सहायता समूहों को नये बर्तन खरीदने के लिये पर्याप्त राशि दी गई है।

नई तकनीक से बन रही सड़कें

सुदूर ग्रामीण अंचलों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का बेहतर अमल हो रहा है। प्रदेश में अब तक करीब 62 हजार किलोमीटर लंबी कुल 13 हजार 810 पक्की सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इस योजना में मध्यप्रदेश देश भर में अव्वल है। इन सड़कों के बनने से गाँव की दिशा और दशा बदली है और गाँव के विकास को रफ्तार मिली है। इन सड़कों पर 59 बड़े पुल का निर्माण किया गया है। वर्तमान में करीब 6 हजार किलोमीटर लंबी नई सड़कों का निर्माण जारी है। पर्यावरण की सुरक्षा के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में प्लास्टिक अपशिष्ट का उपयोग कर 32 जिलों में करीब 500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है। इस तकनीक से सडकें अब ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बन रही है और प्रदेश को पॉलिथीन तथा प्रदूषण से मुक्त करने में मदद मिल रही है।

सुदूर गाँवों तक समृद्धि और विकास पहुँचे इसके लिए जो गाँव प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दायरे में नहीं आ रहे थे उनके लिये राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की है। इस योजना में पहुँचविहीन 9109 गाँव को बारहमासी ग्रेवल सड़कों से जोड़ा जा रहा है। इस योजना में अब तक 12905 किलोमीटर लंबी 6028 सड़कें पुल-पुलिया सहित बनाई गई हैं। इन सड़कों के जरिये 6306 गाँव के 17 लाख 74 हजार लोगों को अब बारहमासी आवागमन सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। मनरेगा अभिसरण से शुरू हुई नई उप-योजना सुदूर ग्राम संपर्क और खेत सड़क योजना के जरिये 20 हजार रोजगारमूलक काम शुरू हुए हैं। इन सड़कों के बनने से जहाँ जरूरतमंद ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है, वहीं किसानों को भी खेत-खलिहान तक आने-जाने और फसलों को मंडी तक ले जाने में आसानी होगी।

जरूरतमंद ग्रामीणों को रोजगार

ग्रीन इंडिया मिशन में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के जरिये गरीब ग्रामीण श्रमिकों के पौध-रोपण से स्थाई आजीविका के अवसर उपलब्ध करवाने का काम शुरू किया गया है। ग्रामीण जॉब-कार्डधारी श्रमिकों को जिनके पास 0.4 हेक्टेयर कृषि भूमि और सिंचाई के साधन है उनके खेतों में फल-फूल और सुगंधित पौधे लगाये जायेंगे। उन्हें हर साल स्थाई आय होगी। प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक फंड मेनेजमेंट सिस्टम (ईएफएमएस) द्वारा वर्ष 2014-15 में 2812 करोड़ मजदूरी की राशि मनरेगा श्रमिकों के बैंक खातों में सीधे जमा करवाई गई है। मध्यप्रदेश ईएफएमएस सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। मनरेगा कन्वर्जेंस से ग्रामीण क्षेत्रों में 70 फीसदी से अधिक स्थाई परिसंपत्तियों के निर्माण के उल्लेखनीय कार्यों के लिये इस साल प्रदेश को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।

सबका विकास-सबको आवास

गाँव में हर गरीब परिवार का अपना मकान हो इसके लिये ग्रामीण आवास योजनाओं का लाभ जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुँचाने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। इंदिरा आवास योजना में मध्यप्रदेश अब देश में तीसरे स्थान पर है। इस योजना में पारदर्शिता के लिये हितग्राहियों को भुगतान की जाने वाली राशि अब राज्य स्तर से उनके बैंक खाते में सीधे जमा करवाई जा रही है। आवासहीन गरीब ग्रामीण परिवारों की जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास मिशन शुरू किया गया है। मिशन द्वारा अब तक 4 लाख 73 हजार 622 परिवार को लाभांवित कर 3624 करोड़ की राशि आवास निर्माण के लिये उपलब्ध करवाई गई है। ग्रामीणों की सुविधा के लिये अब इस योजना में मकान बनाने के लिये दी जाने वाली राशि तीन के स्थान पर दो किश्त में दिये जाने का फैसला लिया गया है। कृषि के लिये सिंचाई सुविधा का बेहतर इंतजाम हो, इस उद्देश्य से एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम में 6016 जल संग्रहण संरचना का निर्माण किया गया है। इनसे 26 हजार 689 हेक्टयर कृषि क्षेत्र में सिचाई सुविधा उपलब्ध हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *