डिजिटल इंडिया – डिजिटल मध्यप्रदेश, डिजिटल हैं हम

सूचना-प्रौद्योगिकी का बेहतर इस्तेमाल आम लोगों की जिन्दगी को आसान बनाने और बेहतर, पारदर्शी प्रशासन देने के लिए भी किया जा सकता है, इसे साबित करने की सफल कोशिश की है मध्यप्रदेश ने। प्रदेश में पिछले एक दशक में सूचना प्रौद्यागिकी सेवाओं का एक ऐसा ढाँचा खड़ा किया गया है जिसके जरिये प्रदेश के आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाया जा रहा है। निवेश हो या नागरिक सेवाएँ आज प्रदेश आई.टी. में उत्कृष्टता का पर्याय बनता चला जा रहा है। सूचना-प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाने, पारदर्शिता बढ़ाने और शासकीय कार्य-प्रक्रियाओं को सुगम और जवाबदेह बनाने के नवाचारों में देश के राज्यों में मध्यप्रदेश का प्रमुख स्थान है।

सेमी कण्डक्टर फेब्रीकेशन निवेश नीति तैयार कर लागू करने और राज्य ई-मेल सेवा पॉलिसी बनाकर उसे लागू करने एवं डाटा शेयरिंग में मध्यप्रदेश का अग्रणी स्थान है। मोबाइल एसएमएस गेटवे में प्रदेश का दूसरा स्थान है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के प्रमुख घटकों मे अपेक्षित लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम चल रहा है। राज्य सरकार के प्रयास हैं कि इलेक्ट्रॉनिक तकनीक में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी स्थान बना सके।

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डिजिटल इंडिया में अग्रणी

हाल ही में संपन्न डिजिटल इंडिया सप्ताह के दौरान विभिन्न कार्यक्रम में भागीदारी की दृष्टि से मध्यप्रदेश देश में अग्रणी रहा है। डिजिटल इंडिया पोर्टल पर सप्ताह के दौरान जन-भागीदारी से हुए विभिन्न कार्यक्रम संबंधी प्रदर्शित जानकारी में यह तथ्य रेखांकित हुआ है। मध्यप्रदेश में डिजिटल इंडिया सप्ताह के दौरान मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं वर्चुअल क्लास के विद्यार्थियों से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये सीधे संवाद किया। इसके सुदूर अंचलों में संचालित वर्चुअल क्लास के छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखा गया। उन्होंने मुख्मयंत्री श्री चौहान से प्रश्न पूछे।

सप्ताह के दौरान महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रदेश में ई-शक्ति अभियान के दूसरे चरण की शुरूआत में छात्राओं एवं महिलाकर्मियों की भागीदारी, राज्य ई-मेल सेवा पर कार्यशाला एवं इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं मेन्युफेक्चरिंग क्षेत्र में कौशल विकास के लिये युवाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत जैसे महत्वपूर्ण आयोजन शामिल रहे हैं। केन्द्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी सचिव ने सप्ताह के दौरान इंदौर, खरगोन जिल के बड़वाह एवं खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सप्ताह के दौरान राज्य, संभाग एवं जिला-स्तर पर कॉलेज एवं स्कूल में छात्र-छात्राओं, शासकीयकर्मियों एवं जन-भागीदारी से विभिन्न कार्यक्रम हुए। छात्र-छात्राओं के लिये विभिन्न रोचक तथा ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएँ भी की गईं।

अनुकूल वातावरण

यह बात उत्साहजनक है कि नई-नई तकनीक को अपनाने के प्रति प्रदेश में अनुकूल वातावरण बना है। डिजिटल इंडिया-डिजिटल मध्यप्रदेश को लेकर प्रदेश का युवा वर्ग खास तौर से उत्साही है। इस दिशा में राज्य शासन के प्रयासों के सुफल आने वाले समय में निश्चित ही देखने को मिलेंगे। प्रदेश में सुशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार तत्परता से काम कर रही है।

निवेश नीति

सूचना-प्रौद्योगिकी आधारित महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के जरिये शिक्षित, योग्य और कुशल युवाओं के लिए प्रदेश में रोजगार के अवसर मुहैया करवाने के उद्देश्य से राज्य की आईटी निवेश नीति-2012 (यथा संशोधित-2014), बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग, बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट, ‘बीपीओ एवं बीपीएम’ उद्योग निवेश नीति-2014 तथा सेमीकण्डक्टर फेब के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को धरातल पर लाने के लिए ”मध्यप्रदेश सेमीकन्डक्टर फेब्रिकेशन निवेश नीति-2015” जारी की जाकर प्रदेश में वृहद आई.टी. अधोसंरचनाओं का विकास किया जा रहा है। इन्दौर एवं भोपाल में आई.टी. पार्क की स्थापना का काम प्रगति पर हैं।

भोपाल तथा जबलपुर में इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स के विकास कार्य तेजी से शुरू किये गये हैं। स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क ‘स्वान’ के जरिये लगभग 5000 शासकीय कार्यालयों को कनेक्टिविटी प्रदान की गई है। प्रदेश में ‘जियोग्राफिकल इन्फारमेशन सिस्टम’ की जरूरत को ध्यान में रखते हुए भोपाल स्थित आईटी सेंटर में जीआईएस लेब संचालित है। शासन का महत्वपूर्ण डाटा वर्ष भर और चौबीसों घण्टे सुरक्षित रखने एवं समय पर जरूरत के अनुरूप आसानी से उपलब्ध करवाये जाने के लिये भोपाल में स्टेट डाटा सेन्टर संचालित है।

निविदाओं में पारदर्शिता के लिए प्रदेश में ई-टेण्डरिंग प्रणाली प्रचलित है। इसके माध्यम से 72 हजार 828 करोड़ लागत की लगभग 49 हजार 712 निविदाएँ जारी की गई हैं। राज्य शासन की प्रभावी सूचना-प्रौद्योगिकी प्रणाली में मानव संसाधन का दक्षता से समुचित उपयोग किये जाने की परिकल्पना को साकार रूप देने के लिये प्रदेश में 15 क्षेत्रीय दक्षता संवर्धन केन्द्र संचालित हैं। शेष जिलों में इनकी स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आई.टी. के उपयोग से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को ‘वर्चुअल क्लास रूम परियोजना’ में विषय- विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। शासकीय कार्यालयों में सूचना के आदान-प्रदान तंत्र में पारदर्शिता, तत्परता एवं विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए राज्य में ई-मेल पॉलिसी लागू की गई है।

आधार पंजीयन

नागरिकों के आधार पंजीयन की महत्ता को ध्यान रखते हुए प्रदेश में आधार पंजीयन का काम प्राथमिकता से किया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को आधार नंबर से जोड़ने की आधार परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा पहल की जा रही है। इसके लिये राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया है। आधार पंजीयन परियोजना के कार्यान्वयन के लिये प्रदेश के सभी कमिश्नर एवं कलेक्टर को जरूरी निर्देश जारी किये गये हैं। प्रदेश में शासकीय सेवकों के आधार नंबर को मतदाता परिचय-पत्र से लिंक करने के लिये विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभाग प्रमुखों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वे अपने यहाँ कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी एवं उनके परिवार के सदस्यों के आधार नंबर को मतदाता परिचय-पत्र से लिंक करवाएँ।

प्रदेश में संचालित विभिन्न परियोजनाओं को एक निश्चित समय-सीमा में पूरा कर इनका लाभ नागरिकों को समय पर मिल सके तथा शासन के संसाधन का सदुपयोग सुनिश्चित हो, इस दिशा में परियोजना प्रबंधन की संस्थागत व्यवस्था स्थापित की गई है।

ई-शक्ति अभियान

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वर्तमान कम्प्यूटर के युग में दैनंदिन की जरूरतों की आसानी से पूर्ति के लिये महिलाओं का इंटरनेट साक्षर होना जरूरी है। राज्य सरकार ने एक अभियान के रूप में ई-शक्ति के दूसरे चरण की शुरूआत की है। अभियान के जरिये प्रदेश में इस वर्ष 5 लाख छात्राओं और महिलाकर्मियों को कम्पयूटर एवं इंटरनेट के उपयोग में जागरूक और प्रशिक्षित किया जायेगा।

ई-शक्ति अभियान के दूसरे चरण में मैप-आईटी द्वारा भारती एयरटेल के सहयोग से भोपाल समेत 7 जिले इंदौर, देवास, ग्वालियर, दमोह, धार एवं खरगोन में कम्प्यूटर एवं इंटरनेट के प्रति जागरूकता एवं डिजिटल साक्षरता का काम किया जायेगा। अभियान में स्कूल, कॉलेज की छात्राओं एवं शासकीय विभाग में कार्यरत महिला कर्मियों को इंटरनेट के प्रति जागरूक कर डिजिटली साक्षर बनाने का लक्ष्य है। अभियान के जरिये अभी तक 19 हजार से अधिक छात्राओं एवं महिलाओं को शुरुआती प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

प्रदेश में कम्प्यूटर आधारित रोजगार के लिये कम्प्यूटर तथा टाइपिंग संबंधी दक्षता के प्रमाणीकरण की एकल सुविधा मुहैया कराने कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा की शुरुआत की गई है। नोडल संस्था मैप आईटी के तत्वावधान में प्रथम प्रमाणीकरण परीक्षा अगस्त 2015 में की जाना प्रस्तावित है। इसके लिये आवश्यक पंजीयन cpct.mp.gov.in पर करवाया जा सकता है। परीक्षा के लिये पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

सीएम हेल्पलाइन

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आम लोगों की दैनंदिन की समस्याओं के निराकरण के लिये शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन-181 व्यवस्था का सफल एक वर्ष पूरा हो गया है। इस दौरान टेलीफोन पर प्राप्त जन-शिकायतों में से लगभग 91 प्रतिशत का संतोषजनक समाधान हुआ है। एक साल के दौरान सीएम हेल्पलाइन पर 58 लाख 51 हजार 800 से अधिक कॉल का उत्तर दिया गया। कुल 10 लाख 44 हजार से अधिक शिकायत दर्ज हुई। इनमें से 9 लाख 53 हजार 600 से अधिक शिकायत का समाधान हुआ, जो लगभग 91 फीसदी है। निराकृत प्रकरणों में से 8 लाख 58 हजार 683 प्रकरण क्लोज कर दिये गये हैं जो लगभग 83 फीसदी हैं। लगभग 10 हजार 900 अधिकारी-कर्मचारी इस व्यवस्था से जुड़े हैं और सदैव तत्पर रहते हैं। हेल्पलाइन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पर रोजाना लगभग 35 से 40 हजार फोन कॉल रिसीव होते हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछली 31 जुलाई 2014 को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएम हेल्पलाइन ‘जन-हेतु जन-सेतु’ की शुरुआत की थी। इस व्यवस्था की समीक्षा लगातार विभिन्न स्तर पर की जाती है। मुख्यमंत्री श्री चौहान स्वयं समय-समय पर अचानक फोन लगाकर शिकायतकर्ताओं से शिकायतों के निराकरण के संबंध में जानकारी लेते हैं। साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह सहित राज्य मंत्रि-परिषद के अन्य सदस्य सहित मुख्य सचिव और सचिव मुख्यमंत्री एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी हेल्पलाइन व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा करते हैं।

नई सहूलियतें – सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था में नागरिकों को नई सहूलियतें मुहैया करवायी गई हैं। फोन लाइनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 300 की गई हैं। हेल्पलाइन पर लगभग 400 योजना की जानकारी अपलोड है। माँग और सुझाव के संबंध में अलग से व्यवस्था की गई है। मोबाइल एप की सुविधा भी दी गई है। एसएमएस के जरिये शिकायतों के निराकरण और उनकी स्थिति की जानकारी दी जाती है।

लोक सेवा गारंटी

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प्रदेश में अपनी तरह की एक अनूठी व्यवस्था ‘लोक सेवा गारंटी अधिनियम’ के अंतर्गत लगभग 22 विभाग की 135 से अधिक सेवाएँ अधिसूचित की जा चुकी हैं। ऑनलाइन सेवाओं में इज़ाफा कर नई 20 से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन किया गया है। अब लगभग 16 विभाग की 68 सेवाएँ प्रदेश में संचालित 336 लोक सेवा केन्द्रों के जरिये नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध करवाई जा रही हैं। विश्व बैंक द्वारा लोक सेवा प्रदाय व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण एवं लोक व्यापीकरण के लिये 300 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं।

जाति प्रमाण-पत्र

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अधिसूचित सेवा जाति प्रमाण-पत्र उपलब्ध करवाने के विशेष अभियान के जरिये 62 लाख 40 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र बनवाये गये हैं। जाति प्रमाण-पत्र बनाने का कार्य नये शिक्षण सत्र के साथ ही पुन: प्रारंभ किया गया है। जाति प्रमाण-पत्र डिजिटल हस्ताक्षर के साथ डिजिटल हस्ताक्षर के साथ डिजिटल रिपॉजिटरी में भी सुरक्षित रखे जा रहे हैं। इससे भविष्य में जब चाहें इसकी इलेक्ट्रॉनिक प्रति ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही डाउनलोड भी किया जा सकेगा। ऑनलाइन जाति प्रमाण-पत्र हर जिले में शासन द्वारा निर्देशित पेपर क्वालिटी और प्रिंटिंग के साथ मुद्रित किये जा रहे हैं। ऐसा करने वाला मध्यप्रदेश, संभवत: देश का पहला राज्य है।

परियोजना प्रबंधन

राज्य स्तर पर संचालित विभिन्न परियोजनाओं के समयबद्ध, दक्ष क्रियान्वयन के लिए प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय गैर लाभकारी संस्था प्रोजेक्ट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के भारतीय प्रभाग के सहयोग से परियोजना प्रबंधन ढाँचे की स्थापना की गयी है । मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा प्रथम राज्य है जिसने अपने प्रयासों से आई.पी.व्ही. सिक्स का क्रियान्वयन कर प्रदेश शासन की लगभग 30-40 वेबसाइटों का आई.पी.व्ही. सिक्स से प्रमाणन किया है।

वर्चुअल आईटी कैडर

ई-गवर्नेन्स और आई.टी. दक्ष मानव संसाधन के लिये शासकीय विभागों में कार्यरत नियमित शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों में से आई.टी. के क्षेत्र में शैक्षणिक योग्यता, अनुभव एवं रुचि रखने वाले अधिकारियों को चिन्हांकित कर उन्हें गहन प्रशिक्षण दिया जाकर वर्चुअल सूचना-प्रौद्योगिकी संवर्ग का गठन किया गया है। इससे सभी शासकीय सेवाओं को डिजिटल इंडिया के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्रदान किया जा सकेगा ।

ई-कार्यालय

सरकारी प्रक्रियाओं तथा सेवा प्रदाय व्यवस्थाओं में दक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में कागज आधारित फाइल प्रणाली के स्थान पर पूर्णतया ई-कार्यालय प्रणाली लागू की जा रही है। वर्तमान में पाँच चयनित कार्यालयों में इसका पायलेट क्रियान्वयन किया गया है । ऑनलाइन सेवाओं के ट्रांजेक्शन में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर है। लगभग 19 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन किये जा चुके हैं।

डिजिटल लॉकर

नागरिकों के अभिलेखों के सुगम संधारण एवं प्राप्ति के लिए डिजिटल लॉकर सुविधा प्रारंभ की गई है। पेपरलेस शासन की अवधारणा को मूर्त रूप देने प्रारंभ की गई। इस सुविधा के माध्यम से हरेक नागरिक को शासकीय क्लाउड पर आवश्यक स्थान (Space) उपलब्ध हो सकेगा। इसमें वह अपने महत्वपूर्ण अभिलेख-शैक्षिक प्रमाण-पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि की स्केन्ड या डिजिटल प्रति सुरक्षित रख सकेंगे।

एमपी मोबाइल एप

प्रदेश के नागरिकों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के जरिए ‘कहीं भी और कभी भी’ लोक सेवाएँ उपलब्ध करवाने की दिशा में एमपी मोबाइल परियोजना की शुरुआत की गई है। वर्तमान में मोबाइल के जरिये नागरिकों को 120 से अधिक सेवाएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

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बायोमेट्रिक अटेन्डेन्स

शासकीय कार्यालयों में अनुशासन एवं समयबद्धता सुनिश्चित किए जाने के लिए प्रदेश तथा मैदानी स्तर के चुने हुए कार्यालयों में आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेन्डेन्स सिस्टम लागू किया गया है। अगले चरण में इसे प्रदेश के अन्य कार्यालयों में लागू किया जाना है।

एसएमएस गेटवे

प्रदेश में 168 उपयोगकर्ता संस्थाओं द्वारा नागरिकों को उनके द्वारा चाही गई सेवा एवं प्रसारण संबंधी जानकारी के 9 करोड़ से अधिक एस.एम.एस. किये जा चुके हैं।

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